Impact of Weak Mars on your Life

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Impact of Weak Mars on your Life

Mars is a very controversial planet in astrology. Mars is a fiery planet and denotes the resistance and vigor in astrology. Actually, any planet can be in have a bad effect when it is placed in a bad mode. Even if the truth is that mars should been feared more than Saturn.

The planet Mars denotes one’s willpower, courage, energy, the strength of body and power in life. A person having good Mars will fulfil his success throughout the life. When the planet Mars is weak, these characteristics can be in a troubled more. The person having weak Mars should identify this and may have to be trained to use his energy properly.

Mars is debilitated in the Sign of Cancer. Cancer is a watery sign and Mars is a fiery planet. In the water sign, Mars will be very uncomfortable. If your Mars is debilitated, then you may have a restless behavior. You may easily get angered or you may not be able to use your courage and vigor in a direct manner.The results can be weaker according to the degrees of debilitation.

When Mars is in retrograde mode, then the person can identify his power and courage later in his life. It can be like some delayed milestones. Mars will be weak in enemy signs and when in conjunction with enemy planets.

You should realize that Mars indicates a lot of mental activity. Willpower is actually a mental property. Even if our body is not that much strong since people win just because of their strong willpower. If your Mars is in a bad mode, you will become ambition-less and you should not think that you are a loser.

The most important factor towards victory is identifying your strength and weaknesses and accepting them wholeheartedly. Along with willpower, your immunity, blood count, and bone health can also get affected. If you have anger issues, then you should realize that and try to control and progress in anger management.
The challenges in the birth chart are not for any specific period like Mahadasa. These challenges are actually a lifelong process and you will get many opportunities to control your life. When you get such opportunities, you should have to use effectively.

Mahadasha : The timing of the events

Mahadasa system is a great feature of Vedic astrology and this is a method to find the timing of events. This feature is only available with Vedic astrology. There are so many other dasha systems like Yogini, Nirayana Shola dasha and Jaimini Chara dasha, and Vimshottari dasha. Vimshottari dasha is the most popular among them.

According to Vedic astrology, the life span of a human being is fixed as 120 years. Not only in astrology, almost all religious text says that, God fixed a human’s life span as 120 years. So, in astrology, 120 years will be under the rulership of different planets


When we generally speak about Mahadasa we always count from Ketu. Why, because the 1st sign in astrology is Aries. The 1st Nakshathra in Aries is Ashwini and it is ruled by Ketu. So, naturally Vimshottari dasa starts from Ketu dasa.

Vimshottari dasa’s base is configured in the Nakshathra lord. Your Nakshthra lord will rule your 1st Vimshottari dasha. Suppose you are born in Purva Bhadra nakshathra and its ruler is Jupiter. So, you will be entering this world by the influence of Jupiter.

Now, you can see in almost all charts, there will be a usage called balance of dasa. What is this? Astrology relies a lot on past birth and reincarnation. According to astrology, life is a continuation and the soul moves from one birth to another and it takes different physical forms. You will die in one time and that time you will be under particular dasa. Then the soul will enter another body and then the rest of the dasa continues.

Vimshottari dasa has Mahadasa and Antardasa. During the beginning of any dasa, you will be under the Mahadasa and Antardasa of same planet, but at time of your birth, your Antardasa planet will be mostly different. So, if you died under the dasa of Jupiter- Venus Mahadasa and few days and left, next time when you born will be starting Jupiter- Venus and rest of the days as Balance of dasa

This is a simple concept to understand balance of dasa, but its calculation is complicated. I will describe that in another article.

In this series, we will study, what Mahadasa is and how it influence your life.

Each planet has a fixed number of years for its influence. The longest Mahadasa duration belongs to Venus and the shortest belongs to the Sun.

After when you understand how this Mahadasa system works, it will be easy for you understand yourself. It is actually very easy to keep a track of your life, if you understand this system.


इन तरीकों से करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न, होगी धन की वर्षा

ज़िंदगी में खुशियों का आधार है धन, हर इच्छा से बढ़कर इच्छा है धन। धन है तो सबकुछ है धन नहीं तो कुछ भी नहीं। सोच कुछ भी हो लेकिन इस भौतिकता की दुनिया में धन सबकुछ अगर नहीं भी है तो भी उसकी कीमत बहुत कुछ है। धन की चाहत हर किसी को होती है। हर इंसान मां लक्ष्मी की कृपा पाना चाहता है। पैसे की किल्लत हो या फिर वैवाहिक जीवन में दिक्कत। नहीं मिल रहा नाम और यश तो लीजिए मां लक्ष्मी का नाम। मां पूरे कर देंगी आपके सारे काम आइए जानते हैं आखिर धन प्राप्त करने के उपाय क्या हैं और कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न।

लक्ष्मी पूजा के नियम

  • लक्ष्मी पूजा का सर्वोत्तम समय मध्य रात्रि का होता है।
  • मां लक्ष्मी की गुलाबी कमल पर बैठी प्रतिकृति की पूजा करनी चाहिए।
  • प्रतिकृति में उनके हाथ से धन बरसता दिखना चाहिए।
  • शंख से घर आएंगी मां लक्ष्मी
  • शंख को लक्ष्मी जी का भाई माना जाता है।
  • जहां शंख होता है वहां लक्ष्मी जी जरूर होती हैं।
  • वामावृत्ति शंख अगर घर में हो तो धन की कमी कभी नहीं होती है।

धन लक्ष्मी दिलाएंगी नियमित धन

  • मां लक्ष्मी के हाथों से धन गिरते हुए स्वरुप की स्थापना करें।
  • चित्र के समक्ष घी का एक बड़ा दीपक जलाएं व इत्र समर्पित करें।

धान्य लक्ष्मी करवाएंगी बचत

  • मां लक्ष्मी के अनाज की ढेरी वाले स्वरुप की स्थापना करें।
  • उनके सामने घी का दीपक जलाएं और चांदी का सिक्का अर्पित करें।
  • पूजा के बाद सिक्के को अपने धन के स्थान पर रख दें।

गज लक्ष्मी दिलाएंगी कारोबार से धन

  • लक्ष्मी जी के दोनों तरफ हाथी वाले स्वरुप की स्थापना करें।
  • मां लक्ष्मी को एक गुलाब का फूल अर्पित करें।
  • पूजा के बाद उसी गुलाब को अपने धन वाली जगह पर रख दें।

ऐश्वर्य लक्ष्मी से नौकरी में मिलेगी तरक्की

  • गणेश जी के साथ लक्ष्मी जी की स्थापना करें।
  • लक्ष्मी जी को अष्टगंध चरणों में अर्पित करें।
  • हर रोज स्नान के बाद उसी अष्टगंध का तिलक लगाएं।

धन कितना भी क्यों ना हो वो जरूरत पड़ने पर कम ही पड़ जाता है। ऐसे में इन उपायों को अपनाकर मां लक्ष्मी की पूजा करें। आपके ऊपर भी बनी रहेगी मां लक्ष्मी की कृपा।


कालसर्प योग के लक्षण और अचूक उपाय

अगर आपके जीवन में अथाह कष्ट है, घर में कलह का वास है। अगर आपके रिश्तों में तनाव है, हर काम में अड़चन आती है, नौकरी में कोई तरक्की नहीं मिल रही है। तो हो जाइए सावधान क्योंकि यह लक्षण हैं सर्प दोष के, उस दोष के जो कभी किसी को चैन से नहीं रहने देता है। जातक की कुंडली में मौजूद दोषों में से एक है कालसर्प दोष जो अगर कुंडली में बन जाए तो जातक का जीवन कांटों की सेज बन जाता है। अगर आप भी इस तरह के दोष से ग्रस्त हैं तो इससे मुक्ति और राहत के उपाय आइए जानते हैं।

क्या है कालसर्प योग

ज्योतिष शास्त्र के आधार पर कालसर्प दो शब्दों से मिलकर बनता है काल और सर्प। शास्त्र के अनुसार काल का अर्थ है समय और सर्प का अर्थ सांप। इसे एक करके देखें तो जो अर्थ निकलकर आता है वो है समय रुपी सांप। कालसर्प का सामान्य अर्थ यह है कि जब कालसर्प योग कुंडली में बनता है तो सर्प दंश के समान कष्ट की अनुभूति जीवन में होती है। कहा जाता है कि जन्म कुंडली में जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाए या केतु और राहु के बीच में आ जाए तो यह योग बनता है। राहु है सांप का मुंह और केतु है सांप की पूंछ तो जिस तरीके से सांप कुंडली मार लेता है, राहु और केतु भी इंसान के कुंडली में सर्प दोष बन जाता है। किसी प्रकार के शुभ योग को भी कालसर्प योग खत्म कर देता है।

कालसर्प योग के संकेत

सपने में नदी, तालाब, कुएं और समुंद्र का पानी दिखाई देना। सपने में खुद को पानी में गिरते देखना व उससे बाहर निकलने का प्रयास करते हुए देखना। रात को उल्टा होकर सोने पर ही चैन की नींद आती है। सपने में पेड़ों से फल गिरते दिखाई देना। पानी से और ज्यादा ऊंचाई से डर लगना। मन में अज्ञात भय का बना रहना। खुद को अन्य लोगों से झगड़ते हुए देखना। सपनें में बड़े-बड़े सांप दिखाई देना। नींद में शरीर पर सांप का रेंगत हुआ महसूस होना। यह सभी सर्प दोष के लक्षण हैं।

कालसर्प दोष दूर करने के अचूक उपाय

सावन के महीने में शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं। बहते हुए पानी में राहु के 108 तंत्रों को प्रवाहित करें। हर मंगलवार को बताशा, सिंदूर चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें। पक्षियों को 40 दिनों तक जौ के दाने खिलाएं। बटुक भैरव की भी पूजा आराधना करने से कालसर्प दोष से निजात मिलता है। गणेश जी की भक्ति व पूजा करने से भी कालसर्प दोष का प्रभाव खत्म होता है। सोमवार को भगवान शिव को तांबे या चांदी का सर्प पूजा पाठ के साथ यानि रुद्राभिषेक के साथ चढ़ाएं। मसूर की दाल को किसी भी शुभ मुहूर्त के दिन गरीब लोगों को दान दें। कालसर्प दोष को शांत करने के लिए बहते हुए पानी में लोहे के नाग-नागिन को बहा दें।

इन उपायों को करने से आप कालसर्प दोष से बच सकते हैं। इसके अलावा निराशा और असफलता के डर को मन से निकाल सतत प्रयास करते रहें। हर संभव कोशिश करते रहें निश्चित तौर पर सफलता प्राप्त होगी।

House Number Numerology – How Your House Number Affects Your Life

Numerology is the study of the magical impact of numbers on one’s life, well-being, future and happiness. One of the top Astrologers in India, Shri Rajesh Shrimali says, ‘Among all the significant numbers such as birthday, anniversary date, vehicle number etc., one of the most important numbers that strongly affects our happiness is our house number’. Although the street or building number also impact our life in a certain way, but it is the House number that dominates the living.

To understand how house number affects our well-being and prosperity, let’s first learn to evaluate it. Below are some simple steps:

Step1: Add the digits of your house or apartment number, not the building or street number. For example, if your address is 326, Park Lane, then add 3+2+6= 11.

Step2: Reduce the sum to a single digit. In the above case, sum is 11, so, we get 1+1=2, on reducing it to a single digit.

Thus, your home is 2 home (As per numerology, the number of your home is 2).

Similarly, if your address is F13, sector 27, then take the numeric value of the letter, F and follow the above procedure to get your house numerology.

Numeric values of alphabets-

A, I, J, Q, Y = 1
B, K, R = 2
C, G, L, S = 3
D, T, M = 4
E, H, N, X = 5
U, V, W = 6
O, Z = 7
F, P = 8

Hence, F + 1 + 3 = 8 (Value of F) + 1 + 3 = 12
Again, reducing 12 to a single digit, 1 + 2 = 3.

Therefore, as per numerology, the number of your house = 3.

Different numeric valued homes have different energies and affect its residents differently.

शीतला अष्टमी पर ऐसे मिलेगा सेहत का वरदान

देवी मां का सबसे निर्मल और शीतल रुप, जिनकी उपासना से मिट जाते हैं सारे रोग-दोष। दूर हो जाता है संक्रामक बीमारियों का प्रकोप। कहते हैं शीतला अष्टमी के दिन देवी की उपासना से विशेष लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि शीतला अष्टमी का व्रत रखने वाले इंसान के संपूर्ण कुल के रोग-दोष को मां शीतला हर लेती है। आइए जानते हैं क्या है मां शीतला की महिमा और क्यों मनाते हैं शीतला अष्टमी का पर्व।

शुभ मुहूर्त व तारीख

इस वर्ष शीतला अष्टमी 9 मार्च को मनाई जाएगी। पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः 06:41 बजे से सायं 06:21 बजे तक है। मुहूर्त की कुल अवधि 11 घंटे 40 मिनट की है।

मां शीतला की महिमा

सबसे पहले उनका उल्लेख स्कंदपुराण में मिलता है। इन्हें बहुत ही सम्मान प्राप्त है। इनका स्वरूप बेहद ही शीतल व रोगों को हरने वाला है। इनका वाहन है गधा और हाथों में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं। मुख्य रुप से इनकी उपासना गर्मी के मौसम में की जाती है। इनकी उपासना का मुख्य पर्व शीतला अष्टमी है। इस दिन माता को शीतल और बासी खाद्य पदार्थ चढ़ाया जाता है, जिसे बसौड़ा भी कहते हैं। इन्हें चांदी का चौकोर टुकड़ा अर्पित करते हैं जिस पर उनका चित्र बना हो। आमतौर पर इनकी उपासना बसंत और गर्मी के मौसम में होती है।

शीतला अष्टमी का वैज्ञानिक आधार और लाभ

चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी के रुप में मनाया जाता है। इस दिन आखिरी बार आप बासी भोजन खा सकते हैं। शीतला अष्टमी के बाद बासी भोजन का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से सेहत बिगड़ सकती है। यह पर्व गर्मी की शुरुआत में आता है यानि गर्मी में आप क्या प्रयोग करे इस बात की जानकारी मिलती है। गर्मियों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए इसका भी सूचकांक है शीतला अष्टमी।

महत्वपूर्ण तथ्य व महत्व

इस व्रत में मिठाई, पुआ, पूरी, दाल-चावल आदि एक दिन पहले से ही बनाए जाते हैं, अर्थात व्रत के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। व्रती रसोईघर की दीवार पर 5 अंगुली घी में डुबोकर छापा लगाते हैं व इस पर रोली, चावल आदि चढ़ाकर मां के गीत गाए जाते हैं। परंपरा अनुसार महिलाएं मां शीतला को बसौड़ा बनाकर पूजती हैं। पूजा करने के बाद बसौड़ा का प्रसाद अपने परिवार में बांट कर सभी साथ में मिलकर बासी भोजन कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन शीतला माता की कथा भी सुननी चाहिए।

शीतला अष्टमी के दिन सभी भक्त खुशहाली और सलामती की कामना लेकर मां शीतला के दरबार में माथा टेकते हैं। मन्नतें मांगते हैं व पूजा अर्चना करते हैं। तभी तो भक्तों के श्रद्धा से प्रसन्न होकर मां शीतला उन्हें आरोग्य, सुख और सुरक्षा का वरदान देती हैं। तो आप भी मां शीतला के इस पर्व का लाभ उठाइए, देवी को प्रसन्न कीजिए जीवन संवर जाएगा।

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