Tips for getting Land and building a home / भूमि एवं भवन प्राप्ति प्रयोग

मनुष्य के जीवन में अपना घर होना बहुत ही आवश्यक है, और यह कर्म तथा भाग्य दोनोें पर निर्भर करता है। जब कोई अपने द्वारा संचित धन से भूमि खरीदकर उस पर मकान बनाता है तो उसके मन में प्रसन्नता से भूमि खरीदकर उस पर मकान बनाता है तो उसके मन में प्रसन्नता हजार गुना हो जाती है। लोकोक्ति में एक कहावत है कि किराये के महल से अपनी झौपड़ी अच्छी होती है। पाठकों के लाभार्थ भूमि और भवन से सम्बन्धित यह प्रयोग है, जिसे प्रयोग में लाकर लाभ उठाया जा सकता है। प्रयोग सिद्ध है। विधि इस प्रकार है।

शुक्ल पक्ष के किसी भी बुधवार को प्रातः अपनी नित्यक्रिया स्नानादि से शुद्ध हो पीले रंग के सूती आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुँह करके बैठ जाये। अपने सामने एक थाली तांबा या कांसा की रखकर उसमें कुमकुम से स्वास्तिक बनायें। स्वास्तिक के बीच में जहाँ बिन्दु लगाये जाते हैं, वहाँ पर चार साबुत सुपारी स्थापित करें। स्वास्तिक के बीच में चावल की एक ढेरी बनाकर उस पर पीला पुष्प रखें, पुष्प पर प्राण प्रतिष्ठा युक्त लक्ष्मीयन्त्र स्थापित करें। सर्व प्रथम हाथ जोड़कर प्रार्थना करें-

यावच्चं सूर्यश्च यावद् देवा वसुन्धरा।

तावन्मम गृहे देवि अचला सुस्थिरा भवः।।

यावद् ब्रह्यादयों देवामनु भुञज चतुर्दशा

तावन्मम गृहे देवि अचला सुस्थिरा भवः।

यावद् तारागणकाशे यावद् इन्द्रादयोऽमरा।

तावन्मम गृहे दवि अचला सुस्थिरा भवः।।

विनियोगः- ऊँ अस्य श्री पृथ्वी मन्त्रस्य वाराह ऋषिः। निवृच्छन्दः। वसुधा देवतः। सर्वेष्ट सिद्धये जपे विनियोगः।

तदोपरान्त अपनी मनोकामना लक्ष्मी के समक्ष दोनों हाथ जोड़कर व्यक्त करें। स्वस्तिक में रखी चारों सुपारी उठाकर अपने बाएं हाथ की मुट्ठी में रखकर दाहिने हाथ से वसुधासौभाग्य ‘‘नीलीहकीक’’ माला से निम्न मन्त्र की चार माला जाप करें।

ऊँ नमो भगवत्यै धरण्यै धरणि धरे-धरे स्वाहा।

पूजा के समय इस बात का ध्यान रखें की बायें हाथ में सुपारी कसकर पकड़े रहे। मन्त्र जप के बाद माला को यन्त्र के पास थाली मे रख दें। चारों सुपारी बायें हाथ में दाहिने हाथ में लेकर मुट्ठी बाँधकर अपने सिर पर चार बार घुमायें, फिर उन सुपारियों को किसी चैराहे पर या खाली मैदान में जाकर पूर्व से दक्षिण परिक्रमा से चारों दिशाओं में फेंक दें। इस प्रकार यह पूजा कार्य चार बुधवार सम्पन्न करना है। हर बार नया स्वस्तिक बनाकर नई सुपारी प्रयोग में लानी है। चार बुधवार के बाद पूजा पूर्ण होने पर या हर बुधवार को लक्ष्मी जी की आरती अवश्य करें। पूजा पूर्ण होने के बाद माला और यन्त्र को जल मे प्रवाहित कर दें। यह एक अत्यन्त सिद्धिदायक श्रेष्ठ प्रयोग है।