Importance of Beesa Yantra / बीसा यन्त्रों के चमत्कार ‘‘ जिनके घर हो बीसा, उसका क्या बिगाड़ेे जगदीशा ’’

बीसा यन्त्रों के चमत्कार

‘‘ जिनके घर हो बीसा,

उसका क्या बिगाड़ेे जगदीशा ’’

अर्थ स्पष्ट है। बीसा यन्त्र एक ऐसा यन्त्र है जोे हर समस्या का समाधान करता है। इसी कारण इसे यन्त्रराज कहा जाता है। बीसा यन्त्र कई प्रकार के होते है। जैसा कार्य या समस्या हो, वैसा ही यन्त्र बनाया जाना चाहिए।

सिद्धि दाता बीसा यन्त्र

इस यन्त्र का निर्माण अष्ट गंध व स्याही से भोजपत्र पर सोने की कलम से लिखना उत्तम रहता है। स्वच्छ भोजपत्र लेकर गुरु पुष्य या रवि पुष्य को या पूर्णातिथि 5/10/15 तिथि को लिखना चाहिए। जिस समय यह मन्त्र लिखें उस समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना आवश्यक है। अपने सामने धूप-दीप, अगरबत्ती जलती रहनी चाहिए। जब यन्त्र तैयार हो जाए तो जिसे यन्त्र दिया जाना है, वहाँ खड़ा हो जाए। यन्त्र को दोनों हाथों में लेकर मस्तक पर लगाएं और सदैव अपने पास रखें। ऐसा करने पर यह सदैव सभी कार्यो में शत प्रतिशत सफलता प्राप्त कराता हैं।

श्री लक्ष्मी बीसा

इस यन्त्र को ताम्रपत्र पर बनाकर आधी रात के समय केशरयुक्त रक्त चंदन से इस यन्त्र पर ऊँ के ऊपर ‘श्री’ लिखकर पीत पुष्प से, बिल्व-पत्र आदि से पूजन करें एवं 16 ऋचायुक्त श्री सूक्त का पाठ करें एवं 7 माला का जाप प्रातःकाल के समय करें। ऐसा नित्य करने से महालक्ष्मी की शीघ्र की कृपा हो जाती है। इस प्रयोग में संपुट लगाकर बीज मंत्र युक्त 7 पाठ करें तो उत्तमोत्तम फल की प्राप्ति होती है।

बीज मंत्रः ऊँ श्रीं हृीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं हृीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मयै नमः।

संपुट:     ऊँ दुर्गे स्मृता हरषि भीति मशेष जन्तोः,

स्वस्थैस्मृता मति मतीव ददासि।

दारिद्रय दुःख भय हारिणी कात्व दन्या,

सर्वोपकार करणाय सदार्द्र चित्ता।।

शिव-शक्ति बीसा यन्त्र

इस यन्त्र को शुभ मुुहूर्त में ताम्रपत्र पर बनवा लें, फिर नित्यप्रति स्नानादि कर साफ धुले वस्त्र पहनकर, पवित्र होकर कुश या ऊन का बना आसन बिछाकर अथवा मृगचर्म पर लाल वस्त्र बिछाकर बैठ जाना चाहिए। मस्तक पर ‘त्र्यम्बक’ मन्त्र से भस्म तिलक धारण करें! अपने सामने एक लकड़ी का पट्टा रखकर उस पर लाल कपड़ा बिछा दें और गंगाजल, पवित्र नदी जल, कूप, किसी सरोवर के जल से यन्त्र को स्नान करवा कर लाल चंदन, रोली, लाल कनेर, गुड़हल के पुष्प या अन्य किसी भी लाल फूलों से पूजन करें। फिर 1 माला अर्थात् 108 बार लाल चंदन की माला या रुदाक्ष की माला से मां भगवती के नवार्ण मंत्र का जाप करें।

नवार्ण मन्त्र:- ऊँ ऐं हृीं क्लीं चामुण्डाये विच्चेः।

जाप के बाद दुर्गा सप्तशती के चतुर्थ अध्याय सकरादय स्तुति कर नित्य पाठ करें। इस प्रकार प्रयोग करने से मां भगवती प्रसन्न हो जाती है। मन चाहा धन, स्त्री, संतान, विद्या, भौतिक, सुखों की पूर्ति करती है। देवी सभी प्रकार के रोगों, संकटों व शत्रुओं को नष्ट कर अभय का वरदान देती है।

सिंह बीसा यन्त्र

 

 

यह यन्त्र मां भगवती चण्डी का है। मां भगवती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए यह अचूक श्रेष्ठतम व उत्तम यन्त्र है जो सभी प्रकार की विपत्तियों को दूर करने के लिए श्रेष्ठ है।

ताम्रपत्र पर बनेे इस यन्त्र को पलास के पत्ते पर स्थापित करके पूजन किया जाना चाहिए। ऐसा करने पर हर प्रकार के शत्रु और विरोधी अनुकूल हो जाते हैं। इस यन्त्र को भोजपत्र पर लिखकर भूजा पर बांधने से शत्रु विशेष भयभीत होकर भाग जाता है। भयभीत शत्रु हार जाता है चाहे कितना ही बलवान क्यों न हो। अतः आत्म-विश्वास की वुद्धि, आत्म-विश्वास दृढ़ करने व शत्रु को भयभीत करने का यह सिद्ध बीसा यन्त्र है।

लक्ष्मी-दाता विजय बीसा यन्त्र

इस यन्त्र को लिखना हो तब ताम्रपत्र पर गुलाल छिड़ककर उस पर चमेली की कलम से एक सौ आठ बार मन्त्र लिखें। वही गुलाल या अन्य दूसरा गुलाल छांटता रहे। बारीक कपड़े में गुलाल रखकर पोटली बनाने से छांटने में सुविधा होगी। जब एक सौ आठ बार लिख लें, तब उसी समय अष्टगंध से भोजपत्र पर या कागज पर यन्त्र को लिखकर पास से रखना उत्तम है। व्यापार या क्रय-विक्रय का कार्य पास में यन्त्र रखकर करें। यदि संभव हो तो रोज धूप करें।

 

राम भद्र बीसा यन्त्र

 

भगवान राम की कृपा करने के लिए इस यन्त्र का निर्माण किया गया है। इसी कारण इस यन्त्र का नाम भी राम भद्र बीसा यन्त्र रखा गया है। ‘ ऊँ नमो राम भद्राय’ इस मंत्र को यन्त्र के प्रत्येक कोष्ठक में अंक क्रम से लिख लें, अर्थात 1 नं वाले कोष्ठक में ऊँ, 2. नं वाले कोष्ठक में ‘न’, 3 नं वाले कोष्ठक मंे ‘मो’, 4 नं वाले कोष्ठक मं ‘रा’, 6 नं. वाले कोष्ठक मंे ‘म’, 7 नं. वाले कोष्ठक मंे ‘भ’, 8 नं. वाले कोष्ठक में ‘द्रा’, 9 नं. वाले कोष्ठक में ‘य’ इस प्रकार से पूरा मंत्र इन आठों खानों में आएगा। पूरा मंत्र लिखकर इसी मंत्र का आठ माला जप करें। तत्पश्चात् ‘रामायण’ या ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। मन्त्र सिद्ध होने पर श्रीराम जी की कृपा से सभी कार्य सफल होते है।

बाल रक्षा बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र की योजना में एक अक्षर बाएं से दाई ओर का एक खाना बीच में छोड़कर दो बार आया है जो रक्षा करने में बलवान है। इस यन्त्र को शुभ योग में भोजपत्र या कागज पर अष्टगंध से अनार की कलम से लिखें और लिखने के बाद भेट कर ऊपर रेशम का धागा लपेटते हुए नौ गांठे लगा दें। बाद मे धूप देवें तथा चांदी के ताबीज में रखें। गले में या कमर पर जहां सुविधा हो बांध लें। वास्तव में गले में बांधना श्रेष्ठ रहता है। इसके प्रभाव से बालक-बालिका के लिए भय, चमक, डर, उबरना आदि उपद्रव नहीं होते तथा हर प्रकार से रक्षा होती है।

सर्व कार्य सिद्धि दाता बीसा

 

इस यन्त्र के प्रभाव से जीवन के सभी कार्यो में सफलता प्राप्त होती है। यह यन्त्र ताम्रपात्र या भोजपत्र पर लिखकर तैयार कर अष्टगंध व चमेली की स्याही व स्वर्ण कलम से लिखें। शुक्ल पक्ष में शुभवार प पूर्णा तिथि (5/10/15) सिद्धि या अमृत योग, अमृत सिद्धि योग, रविपुष्य या गुरुपुष्य के दिन लिखकर रख लें। धूप-दीप करें। प्रातःकाल यन्त्र की स्थापना कर अपने सामने श्वेत आसन पर बैठकर निम्न मंत्र का जाप करें। जप संख्या न्यूनतम साढ़े बारह हजार व अधिकाधिक सवा लाख जप पूरा करें, फिर यन्त्र को अपने पास रखने से हर कार्य में सफलता मिलती है।

मंत्र: ऊँ हृीं श्रीं सर्व कार्य फलदायक कुरू कुरू स्वाहा।

यन्त्र तैयार हो जाने के बाद जब पास में रखा जाए और अनायास प्रसुतिगृह या मृत देह दाह क्रिया मंे जाना हो तो लौटकर यन्त्र को धूप देने मात्र से शुद्ध हो जाएगा।

श्री गरुड़ बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र को ताम्रपत्र पर बनवाया जाना चाहिए। ताम्रपत्र पर बने इस यन्त्र का नित्य पूजन करने से भगवान श्री विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। शत्रु भय नष्ट हो जाता है। सर्प दंश का तथा व्याधियों का भय दूर हो जाता है। इस यन्त्र को घर में दीवार पर घृत सिंदूर से बना देने पर घर में निवास करने वाले सभी सर्प एवं कष्ट घर छोड़कर भाग जाते है। यह गरुड़ यन्त्र है जो सर्प शत्रु है। सभी प्रकार से आनंद में वृद्धि करने वाला यह यन्त्र श्रेष्ठ फलदायक है।

श्री नारायण बीसा

 

इस यन्त्र का ताम्रपत्र पर खूदवा लें। प्रातः काल स्नानादि कर साफ धुले वस्त्र पहन, पवित्र होकर, दैनिक पूजा पाठ से निवृत्त होकर इस यन्त्र को श्रेष्ठ उत्तम आसन पर स्थापित कर लें तथा गंगा जल या पवित्र कुए-बावड़ी आदि के जल से स्नानादि कराएं। इसके बाद जल से स्नान कराएं। इसके बाद केशरयुक्त चन्दन या श्वेत चंदन के अंक क्रम से 1/2/3/4/6/7/8/9 व ऊँ नमो नारायण लिखें। इस मंत्र को आठों कोष्ठकों में लिखकर पुष्प-घृत दीपक आदि से पूजन करके इसी मंत्र का पाठ करें। माला जाप रुदाक्ष माला या स्फटिक माला से करें। श्री विष्णु सहस्त्रनाम या पुरुषसूक्त का पाठ करें तो भगवान विष्णु से प्रसन्नता प्राप्त हो जाती है। इस प्रकार लक्ष्मी जी का निवास स्वतः हो जाता है। शत्रु संहार, भय, रोगादि का निवारण होकर जीवन परम सुखी हो जाता है।

शान्ति-पुष्टि दाता बीसा यन्त्र

 

शान्ति-पुष्टि प्राप्त करने के लिए यह यन्त्र श्रेष्ठतम व उत्तम माना गया है। जब उक्त यन्त्र तैयार करना हो तो स्वच्छ धुले वस्त्र पहनकर पूर्व दिशा की ओर देखते हुए बैठकर धूप-दीप रखकर इष्ट देव का स्मरण कर इस यन्त्र का आम के पटिये पर 108 बार गुलाल छिड़कर लिखें और विधि पूरी होने पर भोजपत्र या कागज पर अष्टगंध से लिखकर यन्त्र को अपने पास में रखें। जिसके लिए यन्त्र बनाया गया हो, उसका नाम यन्त्र के ऊपर लिखें अर्थात् मनुष्य के श्रेयार्थ ऐसा लिखकर शुभ समय में हाथ में चावल, सुपारी लेकर यन्त्र सहित दें। लेने वाला लेते समय तो आदर से लें और कुछ लेने वाला भेंट के नाम से धर्मार्थ खर्च करे। यह यन्त्र शुभ फलदायक है। शान्ति व पुष्टिदायक है। श्रृद्धा के साथ पास में रखें।

हंस बीसा यन्त्र

 

ताम्रपत्र पर इस यन्त्र को षोडषोपचार पूजन करने से अध्ययन में सम्पूर्ण सफलता प्राप्त होती है। स्मरण शक्ति को बल मिलता है। स्मरण शक्ति तीव्र होती है। भूल-जाने का कभी भय नहीं रहता। इस यन्त्र को भोजपत्र पर लिखकर धारण करने से बुद्धि कुुशाग्र हो जाती है। यन्त्र के प्रातः दर्शन करने से अन्तः करण पवित्र और निर्मल बनता है। इसी यन्त्र की कृपा से सरस्वती प्रसन्न होती है। अतः विद्यार्थियों हेतु यह यन्त्र उपयोगी है।

चतुर्भुज बीसा यन्त्र

 

यह यन्त्र धारण करने के लिए है तथा इसे भोजपत्र पर अष्टगंध की स्याही से अनार की कलम से शुभ मुहुर्त में तैयार कर विधिवत् पूजार्चन कर धारण करना चाहिए। ऐसा करने पर अकाल मृत्यु भय अर्थात् शत्रु भय नहीं रहता। भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनी-शाकिनी आदि से सदैव रक्षा होती है। हर प्रकार के उपद्रवों से रक्षा होती है।

सुख-सौभाग्य बीसा यन्त्र

 

यदि आप कार्य-व्यापार में निरन्तर हार रहे हैं। निरन्तर अथक प्रयास करने पर भी हानि से उबर नहीं रहे हो। व्यापार में बाधाएं आ रहीं हों या नौकरी में निरंतर विघ्न उपस्थित हो रहे है। सफलता व सिद्धि आप से दूर भाग रही है। ज्योतिषी कुण्डली देख कर अपार धन, विशेष सफलता, भाग्यवान होने की भविष्यवाणी करता है, पर वह भविष्यवाणी गलत सिद्ध हो जाती है और दरिद्रता है कि पिंड नहीं छोड़ती। ऐसे व्यक्ति को इस यन्त्र का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

विधिवत् पूजा करके दाहिनी भुजा पर या गले में धारण करना चाहिए। ऐसा करने पर सौभाग्य जाग जाता है। सिंदूर-घृत से दुकान या फैक्ट्री, कार्य-व्यापार स्थल पर लिखकर नित्य धूप-दीप करना उत्तम रहता है।

राम हृदय बीसा यन्त्र

 

तांबे पर या भोजपत्र पर लिखे इस यन्त्र का यथाशक्ति पूजन करके रामायण की किसी भी फलदायक चैपाई का पाठ करें। फिर राम-राम की 10 माला का जाप रोज करें। श्रीराम कृपा से इच्छित कार्य सिद्ध हो जाता है। फल की प्राप्ति बहुत जल्दी होती है।

गृह-क्लेश निवारण बीसा यन्त्र

 

जहां घर-गृहस्थी में छोटी-छोटी बातों पर अनायास क्लेश उत्पन्न हो जाते है, छोटी-छोटी समस्याएं जहां कुछ समय बाद समाप्त हो जाती हैं परन्तु कई बार ऐसा भी होता है कि उसे दूर करने में अनेक प्रकार के विघ्न और कठिनाईयां उत्पन्न हो जाती हैं और क्लेश, विघ्न दिन-प्रतिदिन बढ़ता रहता है। जैसे-जैसे दवा ली और मर्ज बढ़ता गया वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है। ऐसे समय में यह बीसा यन्त्र बहुत महत्त्वपूर्ण काम करता है। इस यन्त्र को भोजपत्र या कागज पर यक्षकर्दम से लिखना चाहिए। यन्त्र को लिखने के बाद यन्त्र को ऐसी जगह लगा देना चाहिए कि जिस पर सारे कुटुम्ब की दृष्टि पड़ती रहे और एक यन्त्र घर का मुखिया पुरुष अपने पास में रखें ओर पहला यन्त्र जिस जगह लगाया हो, वह शरीर भाग से ऊंची जगह पर लगाएं और रोज धूप देकर प्रार्थना करें तो क्लेश नष्ट हो जाएगा। प्रत्येक कार्य में श्रद्धा और विश्वास रखना चाहिए। इष्ट के स्मरण को कभी भूलना नहीं चाहिए। ऐसा करने पर कार्यसिद्धि अवश्य होता है।

सुदर्शन बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र को ताम्रपत्र पर उत्कीर्ण करवाकर मकान निर्माण के समय पूजादि कर नींव में रख देने से मकान चिरकाल पर स्थायी रहता है। मकान में रहने वालों में सुख-शान्ति, आनंद-ऐश्वर्य बना रहता है। धन-धान्य, ऐश्वर्य की श्री वृद्धि होती हैै।

इस यन्त्र का कांसे की थाली में गेरु से लिखकर धूप दीप करके जल में घोल लें और उस घोल को प्रसूता स्त्री को पिलाने से प्रसव सुलभ होता है।

इसी यन्त्र को घी और सिंदूर से मकान की दीवार पर लिखने से हर प्रकार का कष्ट और अनिष्ट दूर हो जाता है।

विघ्नविनाशक बीसा

 

इस यन्त्र को भोजपत्र पर लिखकर अपनी दाहिनी भुजा पर बांधकर आप जो भी कार्य करना चाहें करंे, वह अवश्यमेव सिद्ध होगा।

आधे-अधुरे कार्य समय पर पूरे होंगे। घर में, दीवार पर, दुकान में या फैक्ट्री अथवा कार्य स्थान पर घी में मिलाकर, सिंदूर से लिखने पर घर में कलह, उपद्रव, विघ्न-बाधाएं, अशान्ति आदि समाप्त हो जाती है। खेत-खलिहान, बाग-बगीचे में गाड़ देने से खेत में होने वाले नुकसान रुक जाते है। पशु-पक्षी नुकसान नहीं करते। फसल चोरी होने का भय नहीं रहता। पैदावार में निरन्तर वृद्धि होती है।

पुरुष बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र को भोजपत्र पर लिखकर नित्य प्रातः नियमपूर्वक पूजन करते रहने से सभी प्रकार के संकट जीवन से दूर हो जाते हैं।

संकटनाशक शक्ति इस यन्त्र में है। रोगी या पीड़ित जिस रोग से या संकट से ग्रसित हो, वह उस कष्ट को इस यन्त्र के ऊपर लिखकर धूप-दीप करें। हाथ में, लाल वस्त्र में बांधकर धारण करें। रोग और संकट से मुक्ति मिल जाएगी। भूत-प्रेत और यक्ष-राक्षस आदि भी इस यन्त्र के धारण करने से दूर हो जाते हैं।

भूत-पिशाच-डाकिनी पीड़ा निवारण बीसा यन्त्र

 

जब ऐसा वहम हो जाए कि भूत पिशाच-डाकिनी आदि पीड़ा दे रही हैं और यन्त्र-मन्त्र-तन्त्र वालों की जानकारी प्राप्त की जा रही है। इस प्रकार के वहम प्रायः स्त्रियों में हो जाते हैं और ऐसे वहम का असर हो जाने से दिन भर सुस्ती रहती है, रोती हैं, रुग्णता रहती है और ऐसे वहम का असर से पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है, और भी अनेक प्रकार के उपद्रव हो जाने से सारा परिवार चिन्तातुर हो जाता है और मन्त्र-तन्त्र वालों की तलाश करने में बहुत व्यय करते हैं। ऐसे समय में यह बीसा यन्त्र विशेष उपयोगी सिद्ध होता है।

इस यन्त्र को यक्षकर्दम से अनार की कलम से लिखना चाहिए। लिखते समय अपना मुंह उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। यन्त्र भोजपत्र पर अथवा कागज पर लिखकर दो यन्त्र तैयार करें। इस यन्त्र को ताबीज मंे डालकर गले में पहनें या हाथ पर बांध लें।

दूसरा यन्त्र नित्य प्रति देखकर डिब्बी में रख दें और जिस समय पीड़ा हो तब 2-4 मिनट तक आंख बंद किए बिना यन्त्र को एक दृष्टि से देखकर पुनः डिब्बी में रख दें। ऐसा करने पर पीड़ा दूर हो जाएगी। कष्ट मिट जाता है और अपव्यय से बचेंगे।

मण्डन बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र को भोजपत्र पर लिखकर मकान, तिजोरी में रखने से अन्न, धन-लक्ष्मी की कमी नहीं रहती है।

भोजपत्र पर बने इस यन्त्र को भूजा या गले में ताबीज में धारण करने से शरीरिक बल और स्वास्थ्य-सौंदर्य में वृद्धि होती है। यह यन्त्र भोजपत्र पर तैयार करके बाग या खेत में गाड़ देने से फल व अन्न की हानि नहीं होती है।

द्यूत बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र को सिद्ध करके अपने पास रखने से द्युत अर्थात् जुआ, सट्टा आदि में विजय श्री प्राप्त होती है।

इष्ट ग्रह कुमार बीसा

 

इस यन्त्र को पीपल के पत्ते पर लिखकर जिस ग्रह से पीड़ा या संकट हो उस ग्रह का नाम लिख लें और भूमि में गाड़कर उसके ऊपर उस ग्रह के मन्त्र से हवन करके नमस्कार कर दें। इस प्रकार से वह कुपित ग्रह शान्त हो जाता है। पीपल के पत्ते पर बने इस यन्त्र के ऊपर चोरी गई वस्तु का नाम लिख कर घी, धूप-दीप से पूजन करें। इस मंत्र की 40 माला का जाप प्रातः काल ब्रह्म-मुहूर्त मे करके इस यन्त्र का बहते जल में विसर्जन कर दें तो चोरी गई या खोई वस्तु मिल जाती है।

ताम्रपत्र या भोजपत्र पर यह यन्त्र बनाकर घर में रखें। घी, दीप, धूप से पूजन करें जो सुख -सौभाग्य की वृद्धि होकर सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिल जाती है। भोजपत्र पर लिखकर अपने पास रखने से सदा विजय प्राप्त होती है और वह व्यक्ति सबका प्रिय बन जाता है।

स्थानान्तरण बीसा

 

इस यन्त्र को किसी शुभ दिन प्रायः काल के समय 108 बार भोजपत्र पर लिखे जाने पर उन्हें बहते पानी में बहा दें तो साधक का स्थानान्तरण इच्छित स्थान पर हो जाता है।

गृह निर्माण बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र को गुरुपुष्य या रविपुष्य अथवा अमृत योग पूर्णा तिथि के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में अष्टगंध, रक्त चंदन या केशर से चमेली की कमल से भोजपत्र पर 11,000 बार लिखें तथा बताई क्रियानुसार मंत्र भी लिखें। इसे बहते जल में प्रवाहित कर दें तो इच्छित भवन निर्माण की पूर्ति होती है।

पद प्राप्ति बीसा यन्त्र

 

इस यन्त्र का लेखन बृहस्पतिवार से प्रारम्भ करें। यन्त्र रक्त चंदन से अनार की कलम से भोजपत्र पर लिखें । प्रतिदिन 101 यन्त्र लिखें व उन्हें जल मं प्रवाहित कर दें। कुल 5 हजार यन्त्र लिख कर जल में बहा देने पर पदवृद्धि अवश्य होती है।

त्रिभुज बीसा यन्त्र

यह यन्त्र 9 त्रिभुजों से निर्मित विशेष सफलतादायक बीसा है। इस यन्त्र को 21 दिन तक प्रतिदिन 101 की संख्या में अष्टगंध की स्याही से भोजपत्र पर लिखना चाहिए। लिखे हुए सभी यन्त्रों को आटा गूंथकर छोटी-छोटी गोलियां बना, उसमें लपेटकर मछलियों को खिला दें। अंतिम दिन स्वर्ण पत्र पर यह यन्त्र प्राण-प्रतिष्ठित करके गले में धारण करेें। ऐसा ही एक यन्त्र पूजा स्थान पर स्थापित कर दें। जिसका साधक नित्य धूप-दीप नैवेद्य से पूजन करता रहे तो इस यन्त्र के प्रभाव से व्यक्ति की निरन्तर अबाध गति से उन्नति होती है। शत्रुओं का बल नष्ट होता है। अपने प्रत्येक कार्य में सफलता प्राप्त होती है। अज्ञात इष्ट शक्ति कदम-कदम पर सहायता करती है।