How to win over Enemies / विरोधियों को कैसे बनायें अनुकूल तंत्र मार्ग

विरोधी चाहे जितना शक्तिशाली, बलशाली, उच्चपदासीन हो परन्तु आपके हर कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा हो और हर संभव प्रयास करने पर भी अनुकूल नहीं हो रहा हो तो उसे अपने अनुकूल बनाने के लिए तीन प्रणव ऊँ लगाकर गायत्री का जाप किया जाना उत्तम रहता है। जप काल में इस प्रकार का ध्यान रखा जाना चाहिए कि हमारे मस्तिष्क में से नील वर्ण का विद्युत प्रवाह निकलकर उसके मस्तिष्क में जा रहा है, जिसे कि अपने अनुकूल बनाना है और वह उससे प्रभावित होकर हाथ जोड़कर सामने खड़ा होकर प्रसन्न मुद्रा में हमारे अनुकूल विचारांे में बातचीत कर रहा है और अपनी मित्रता व सहयोग का आश्वासन दे रहा है। किसी भी व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए यह ध्यान अत्यन्त सफल है।

ऊँ ऊँ ऊँ भूर्भुवः स्वं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

शत्रु परिहार

शत्रु द्वारा नित्य हानि पहुँचाने वाली मनोवृत्ति व द्वेषभाव को परिवर्तन करना आवश्यक हो तो निम्न प्रकार से गायत्री की साधना करनी चाहिए।

जातक साधना काल में लाल वस्त्र धारण करें। ऊनी वस्त्र का आसन बिछाए। जिस व्यक्ति को द्वेष भावना से दूर करना हो, उसका नाम पीपल के पत्ते पर लाल चंदन की स्याही और अनार की कलम से लिखे। उसे उल्टा करके अपने सामने रख दे। चार ‘क्ली’ शब्द का अर्थात बीज मंत्रों का सम्पुट लगाकर गायत्री मंत्र का उच्चारण करे और प्रत्येक मंत्र के उच्चारण के पश्चात चम्मच से कुछ जल उस पत्ते पर छोड़ते जाए और यह भावना करे कि अमुक व्यक्ति कट्टर शत्रुता को भूलकर हमसे मित्रभाव से बातचीत कर रहा है। इस प्रकार कम से कम 108 मन्त्रों का जाप किया जाना चाहिए। सिंह की सवारी किए हुए, हाथ में खड्ग लिए भाव बनाए हुए दुर्गा वेषधारी गायत्री का ध्यान करना चाहिए। जप लाल चंदन की माला से करना चाहिए।

 

तारा यंत्र

सामग्री: लाल वस्त्र, ऊनी आसन, अनार की कलम, पीपल का पत्ता, लाल चंदन की स्याही, जल व जल-पात्र, लाल चंदन की माला।

क्लीं क्लीं क्ली ऊँ भूर्भुवः स्वं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।