Abhimantrit kar pehna Rudraksh hi faldayi / अभिमंत्रित कर पहना रूद्राक्ष ही फलदायी


अभिमंत्रित कर पहना रूद्राक्ष ही फलदायी

 

रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व तो है परंतु ज्योतिषीय व आयुर्वेदिक महत्व भी कम नही है। इसे धारण करने, नित्य पूजा करने विविध रूपों में इसका उपयोग करने से सभी प्रकार की खुशी प्राप्त होती है। साधकों के लिए मुख्य रूप में एक मूखी से लेकर चैदह मुखी तक तथा गौरीशंकर रूद्राक्ष उपयोग में लाए जाते है। रूद्राक्ष एक फल होता है। इसका रंग, मुख व उस पर बना छिद्र प्राकृतिक रूप से होता है। यह मुख्यतः चार रंगों मे पाए जाते है।

1-  श्वेत वर्ण

2-  लाल वर्ण

3-  पीत वर्ण

4-  श्याम वर्ण

रूद्राक्ष धारण करने से जातक की अल्प आयु में मृत्यु नहीं होती। हृदय व रक्तचात रोग इसके धारण करने में समाप्त हो जाते है। रुद्राक्ष धारण करने के लिए सोमवार का दिन श्रेष्ठ है। तिथियों में द्वितीय, तृतीय, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, नवमी, दशमी, एकादशी व पूर्णिमा को भी रुद्राक्ष धारण कर सकते है। असली रुद्राक्ष रक्तचात, वीर्यदोष, बौद्धिक विकास, मानसिक शांति, पारिवारिक एकता, व्यापार में सफलता व क्षणिक उन्माद व गुस्सा शांत करता है। वैसे तो प्रत्येक रंग के रुद्राक्ष का महत्व है परंतु श्याम वर्णी (काला) रुद्राक्ष का अत्यधिक उपयोगी व लाभकारी है।

रुद्राक्ष में विद्युत शक्ति विद्यमान होती है जो कि मानव के शरीर से घर्षण करके हमें विशेष प्रकार की ऊर्जा प्रदान कराता है। शरीर इसे ग्रहण कर लेता है। अतः जातक के ग्रह प्रतिकूल होने पर रुद्राक्ष धारण करने से ग्रहों का अनुकूल फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में कहा गया हैं-

रूद्राक्ष यस्यः गात्रेषु ललाटे च त्रिपुण्ड्रक्म।

स चाण्डालोऽपि सम्पूज्यः सर्ववर्णोत्तमो भवेत्।।

अर्थात् रुद्राक्ष को शिव का अंश माना गया है। वैसे तो यह अमूल्य फल ऋषियों के शरीर की शोभा है परंतु यह हर प्रकार से मनुष्य जाति के लिए उपयोगी है। यूं तो रुद्राक्ष को वैज्ञानिक आधार पर बिना मंत्र के उच्चारण किए भी धारण किया जा सकता है किंतु यदि शास्त्रीय विधि से अभिमंत्रित करके धारण किया जाए तो अति उत्तम रहता है। अतः रुद्राक्ष के प्रत्येक मुख के अनुसार इसे धारण करने के लिए अलग से मंत्र पाठ करने का नियम है।