vashikaran

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वशीकरण क्या है ?

सामान्य जीवन में दो विषय हमारे सामने आते हैं। पहला विषय है, जो प्रत्यक्ष है परन्तु हमे उसका ज्ञान नहीं। जैसे कि आप डाॅक्टर नहीं है, परन्तु डाॅक्टर होता है, उसे हमारे शरीर से सम्बंधी अंगों का ज्ञान होता है। वह उस ज्ञान के जरीये आपका इलाज करता है। इसी प्रकार प्रत्येक विषय के कुछ ज्ञाता होते है। ये लोग विषय विशेषज्ञ कहलाते है। जैसे कि डाॅक्टर, इंजीनियर इत्यादि। इसकी अगली उच्च श्रेणी है, कला। कला को कलाकार उत्पन्न करता है। कला की उत्पति मस्तिष्क की एक उपज है। ऐसी उपज पैदा करने वालों को कलाकार कहा जाता है। कलाकार जैसे चित्रकार, मूर्तिकार, शिल्पकार इत्यादि। कला की अगली कड़ी जादू है। जादू तक बहुत कम लोग पहुच पाते है। जिसका आपको आभास तक नहीं हो पाता। आपकी आँखों के सामने एक आदमी आपको चकमा देकर चैंका देता है। जादू का ही एक हिस्सा ज्तपबा है। जादू आप सभी ने देखा है। भारतीय जादूगर सामान्यतः ज्तपबा का ही उपयोग करते है।
जब भी कहीं पर हम जादू की बात करते हैं तो लोग एकदम चैंक उठते हैं। विशेष रूप से आज के पढ़े लिखे लोग तो इसका मजाक ही उड़ाते हैं। वास्तव में जादू का अर्थ क्या है ? यह बात तो आम आदमी की समझ में आती ही नहीं, क्योंकि हमारे समाज में तांत्रिकों और जादूगरों को हद से अधिक ही बदनाम कर दिया गया है। कितने दुर्भाग्य की बात है कि जिस विद्या को मानव जाति के कल्याण और ज्ञान के लिए प्रयोग में लाया जाता था वही विद्या आजकल पाप की कमाई का साधन बनती जा रही है। इस विद्या की आड़ में धन कमाने की दुकानें खोलने वाले मानव कल्याण की बात को भूल कर दूसरों के विनाश की बातें सोचने लगे हैं। इसी के कारण ही यह ज्ञान शास्त्र बदनाम होने लगा है।

वशीकरण साधारण और सरल नहीं, क्योंकि आज के अशांत और बिखरे हुए समाज को एक ऐसे ज्ञान की आवश्यकता हैं। जो भटके हुए लोगों के अंधेरे जीवन पथ में प्रकाश की किरण बन सके। सम्मोहन विज्ञान इक्कीसवी सदी के लिए एक वरदान है। इससे हम अशांत मन को शांत करने में सफल हो सकते हैं, क्योंकि यही एक मात्र ऐसा ज्ञान है जिसका सम्बन्ध सीधा हमारे मन से है। मन का सीधा सम्बन्ध हमारे जीवन से है।

यही एक मात्र ऐसा विषय है। जिसे लेकर अनेक विद्वानों, ऋषियों, मुनियों ने मानव जाति के सुख और शांति के लिए अनेक प्रयत्न किये हैं और आज भी आधुनिक विद्वान मन की नींव पर मानव जाति के उद्धार की बातें करते हैं।

परन्तु यह कैसी विडम्बना है कि लोग जीवन के इस रहस्य को समझने का प्रयास नहीं कर रहे। शायद इसका कारण यह भी हो सकता है कि इस विषय को लेकर साहित्यकारों और लेखकों ने सोचना ही बंद कर रखा है, हो सकता है कि यह विषय बहुत जटिल और उलझा हुआ हो जिसके कारण मेरे साथी अपनी कलम उठाते हुए डर रहे हैं।

इन सब हालात को देखते हुए मैंने इस विषय पर कलम उठाने का प्रयास किया। इसे साधारण बात नहीं कहा जा सकता। इस विषय पर कार्य करना अंगारों के खेल से कम नहीं, क्योंकि इस समय कुछ पाखंडी लोगों ने इस विद्या को बदनाम करना शुरू कर दिया है। ऐसे अवसर पर किसी ऐसे ही ज्ञानवर्धक सामग्री की आवश्यकता थी, जो हमारे पवित्र ज्ञान को बदनाम होने से बचा सके, बस यही सोच कर मैंनें इस अति आवश्यक और रहस्यमयी विषय पर अपनी कलम उठायी है। मैं जानता हूं इस समय बाजारों में अनेक ऐसी पुस्तकें जैसे कि काला जादू असम-बंगाल का जादू प्राचीन जादू जादूगरी शिक्षा जैसी अनेक घटिया पुस्तकें बिक रही है। धन कमाने के लोभ में अंधे लोग आम जनता को पथ भ्रष्ट कर रहे हैं, ऐसे हालात में मेरी जिम्मेवारी और भी बढ़ जाती है।

यह सब कुछ मेरे सामने है। मैं कोई समाज सुधारक या कोई नेता नहीं हूं, जो केवल नारों से ही आप का पेट भर दूंगा। मैं तो एक विषय विशेषज्ञ हूं जिसके पास आपको देने के लिए शब्दों की ही आकृति है। इन शब्दों से ही तो ज्ञान मिलता है और जो शब्द मानव जाति के कंल्याण के लिए लिखे जाएं, उनकी तुलना तो किसी भी खजाने से नहीं की जा सकती।

सम्मोहन विद्या हिप्नोटिजम के विषय पर आधारित यह रचना आप सबके लिए उपयोगी है आईये इस ज्ञान के सागर में डुबकी लगाऐं।

सम्मोहन विद्या और मानव जाति

सम्मोहन विद्या के विषय में आरंभ करते समय मैं एक बात को तो पूर्ण रूप से स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह विद्या हमारे देश की सर्वश्रेष्ठ और प्राचीन विद्या है। आदि मानव से लेकर आज तक मानव जाति इस विद्या के खेल देख रही है। कुछ लोग भले ही इस का मजाक उड़ाते रहें या इस को घृणा की नजरों से देखें परन्तु इस बात से कौन इन्कार कर सकता है कि सम्मोहन विद्या हजारों वर्षो से ही मानव जाति के साथ जुड़ी हुई है। प्राचीन काल में इस विद्या को प्राण विद्या या त्रिकाल विद्या के नाम से जाना जाता था।

प्राचीन काल से लेकर आज के युग में प्रवेश करते समय हम यह देखते हैं कि आज भी इस विद्या की विशेषता में कोई कमी नहीं आई। चाहे कैसे भी हो इस की मान्यता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। हां, इस विद्या की पवित्रता पर यदि कोई दाग लगा है तो इस का कारण मात्र यही है कि इसे जादू के साथ जोड़ दिया गया।

आप में से बहुत से लोग इस बात को जानते होंगे कि आज जिस ओर भी हम देखते हैं। जादू-टोना, तंत्र ही प्रधान हो रहे हैं। इसी आड़ में लोग न जाने कितने लोगों को लुट रहे हैं। ऐसे लोगों के कारण ही यह विद्या दिन प्रतिदिन बदनाम होती जा रही है, अन्यथा यह विद्या तो अपने आप में ही एक चमत्कारी विद्या बनी रही है। यदि हम एक बार अपने अतीत की ओर नजर डाले, तो यह बात पूर्ण रूप से स्पष्ट हो जाती है कि हमारे योगी, मुनि, ऋषि अपनी इच्छा शक्ति, तपस्या के बल से सारे संसार को ही अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं, विश्व के अनेक विद्धानों ने भारत में आकर हमारी प्राचीन सम्मोहन विद्या के ग्रन्थों का अध्ययन किया और उन योगियों, तपस्वियों के दर्शन किए जो अपनी योग शक्ति से ऐसे- ऐसे चमत्कार दिखाते रहें, जिनसे उनके आश्चर्य की कोई सीमा न रही।

यही नहीं, इन विदेशी विद्धानों ने जब यह देखा कि अपनी आंखों की शक्ति से ही अनेक रोगियों को ठीक कर देते थे, यंत्र, तंत्र द्वारा तो रोगों का उपचार भारत वर्ष की एक शान रही हैं, अपनी अंगुलियों के स्पर्श से ही अनेक रोगों का उपचार हमारे ऋषि, मुनि सम्मोहन विद्या से करते रहे हैं।

सम्मोहन विषय कोरी कल्पना नहीं, न ही कोई धोखा है, इस विद्या का दूसरा नाम भविष्यवाणी भी है, भविष्यवाणी का दूसरा नाम भी सम्मोहन विद्या है, आप जब भी किसी प्राणी के रहस्य की बात उसकी आंखों की गहराइयों में झांक कर देख लेते हैं, तो यह सम्मोहन विद्या है।

सदियों में चला आ रहा सम्मोहन आज भी यदि जीवित है तो इसका अर्थ स्पष्ट है कि सम्मोहन एक अटल और विश्वास का पात्र विषय अवश्य है। जो एक गुप्त शक्ति है, जिसको समझने के लिए भी एक विशेष विद्या की आवश्यकता है।

वास्तव में आरंभिक काल में सम्मोहन का प्रयोग मानव जाति के कल्याण और भलाई के लिए ही किया गया वैसे भी हम में से अनेक लोग ऐसे हैं, जो केवल सुखी जीवन ही व्यतीत करना चाहते हैं, लेकिन देखने की बात यह है कि हम में से कितने आदमी ऐसे हैं जो अपनी इच्छा के अनुसार यह खुशी प्राप्त कर पाते हैं, अपनी इच्छाओं को पूरा कर पाते है।

इसका उत्तर स्पष्ट है कि ऐसा नहीं हो पाता। हम में से पांच प्रतिशत लोग भी वह सब कुछ नहीं प्राप्त कर सकते जो वे चाहते हैं। इसका परिणाम क्या होता है ? बेचैनी, चिंता, निराशा, अवसाद जो कि मूल रूप से मानव जाति के बड़े शत्रुओं में से माने जाते हैं। गरीब-अमीर सभी निराशा और दुःखों से घिरे नजर आते है।

लेकिन इस निराशा के साथ जब आशा की किरणों को हम देखते है, तो यह माने बिना नहीं रह सकते कि नंगी घूमने वाली मानव जाति जो फुल पत्ते खाकर अपना पेट भरती थी। आज यदि उन्नति के शिखर पर पहुंच चुकी है तो उसके पास बुद्धि और धैर्य शक्ति तो है। जिसे इतने विरोध और निराशा के बावजूद भी सफलता मिलती चली गई। ऐसी सफलता ने उसे शक्तिशाली भी बनाया और साथ ही यह अहसास भी दिलाया कि उसकी इस शक्ति के पीछे किसी महाशक्ति का हाथ है।

इसी महाशक्ति की कल्पना ने ईश्वर के नाम की नीवं रखी थी और मानव जाति ने सूर्य, चांद, सितारों, वायु , पानी के सामने अपना सिर झुका कर उनकी पूजा आरंभ की। इसका कारण था कि इनके सहारे ही तो मानव जीवन चल रहा था। कुछ लोग देवी, देवताओं की भी उपासना करने लगे।

इनमें से कुछ लोग ऐसे भी पैदा हुए जिन्होंने मानव जीवन के इन सब रहस्यों को जानना चाहा, प्रकृति के खेल को समझने का प्रयास किया। वे धरती के नीचे छुपे ज्ञान को बाहर निकालना चाहते थे। वे सूर्य, चांद, सितारों और देवताओं की पूजा न करके इन की शक्ति को आम जनता के सामने लाना चाहते थे। इन्हें वैज्ञानिक और आविष्कारक कहा गया। आम लोग, इन्हें जादूगर भी कहने लगे क्योंकि उनका यह मत था कि उन्होंने देवी देवताओं को अपने वश में कर लिया है।

बस, यह एक मात्र रहस्य था, हमारे जादू के खेल का, इन्सानी शक्ति ने आविष्कार करके वास्तव में ही जादू कर दिया था, किन्तु अब एक बात तो स्पष्ट होनी चाहिए कि-

जादू और आविष्कार में बड़ा अंतर होता है।

जादू का जन्म वहम के साथ जुड़ा हुआ है किन्तु आविष्कार एक सत्य है, प्रमाण हैं, मानव शक्ति का।

मानव शक्ति को दो भागों में बांटा जा सकता है जिसे हम इस प्रकार से देखते हैं –

1. आविष्कार की शक्ति, 2. अध्यात्मिक शक्ति

वास्तव में यह दोनों शक्तियाँ एक साथ कभी भी चल नहीं पाई हैं। विशेष रूप से आध्यात्मिक शक्ति कई भागों में बंटती चली गई। सम्मोहन और जादूगरी की इस अपार सफलता के पश्चात् कुछ लोगों ने धोखे का दामन पकड़ लिया, बनावट की दुनियां में खोट के सिवा कुछ नहीं होता, जब लोग सम्मोहन के नाम पर व्यापार करने लगे हों तो फिर प्राकृतिक शक्ति समाप्त हो जाती है। यही नहीं विज्ञान के बढ़ते चरणों ने भी इस शक्ति की पकड़ ढीली कर दी। जिससे सम्मोहन विद्या का विकास रूक गया ।

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